Vampire- खून पीने वाले शैतान

क्या होगा अगर मैं आपसे कहूं कि वैम्पायर के बारे में आपने अब तक जो कुछ भी सुना है, वो सब अब बदलने वाला है?
दोस्तों, मेरा नाम है प्रवीण, और मेरे YouTube चैनल में आपका स्वागत है। और आज है Thursday, मतलब The Day of Urban Legends। और आज के एपिसोड में, मैं आपको मिलवाने वाला हूं एक ऐसे खतरनाक शैतान से, जिसकी खून की प्यास कभी शांत नहीं होती। आज हम बात करने वाले हैं वैम्पायर के बारे में। वैम्पायर के बारे में आपने फिल्मों और कॉमिक्स में बहुत पढ़ा और सुना होगा। लेकिन ये असल में क्या होता है, और कहां से आता है, ये आप नहीं जानते होंगे। आपको याद होगा कि करीब 5 साल पहले मैंने अपने दूसरे चैनल हिंदी हॉरर स्टोरीज पर वैम्पायर की रियल स्टोरीज के 2 वीडियो डाले थे। और उन स्टोरीज को सुनने के बाद बहुत से लोगों ने मुझे वैम्पायर को लेकर कॉन्टैक्ट किया था। और मुझसे कॉन्टैक्ट करने वाले इन लोगों में एक इंसान ऐसी भी थी जो खुद एक वैम्पायर थी। जी हां, एक रियल वैम्पायर।

अब दोस्तों, मैं आपको बताऊं कि वैम्पायर, जो ये टर्म है, वैसे तो ये एक वेस्टर्न टर्म है। वेस्टर्न कंट्रीज, खासकर यूरोपियन कंट्रीज में माना जाता है कि वैम्पायर एक ऐसा शैतान होता है जो सिर्फ खून पीने के लिए ही शिकार करता है। अब सबसे पहला सवाल तो ये आता है कि ये वैम्पायर सच में होता भी है या नहीं। क्योंकि ऐसे तो किस्से-कहानियों में हम न जाने क्या-क्या सुनते रहते हैं। तो इसके लिए मैं आपके सामने आज कुछ फैक्ट्स रखने वाला हूं, जिसके बाद आप खुद फैसला कर पाएंगे कि ये शैतान सच में होते हैं या नहीं। और वैम्पायर, मतलब खून पीने वाले शैतानों की ये कहानियां सिर्फ किसी एक देश या धर्म में नहीं, बल्कि across the countries, religions and cultures हमें इस तरह के शैतान के बारे में सुनने को मिलता है। यहां तक कि यहां इंडिया में भी इस शैतान को पिशाच के नाम से जाना जाता है। पिशाच के बारे में मैं अभी थोड़ी देर में बात करूंगा। उससे पहले मैं आपको बता दूं कि फिल्मों में जैसे दिखाते हैं न कि वैम्पायर बहुत गुडलुकिंग और स्मार्ट और लंबे-तगड़े और रोमांटिक होते हैं, रियलिटी में ये वैम्पायर रोमांटिक नहीं, बल्कि बहुत खतरनाक होते हैं।

जैसा कि मैंने बताया कि वैम्पायर जाने जाते हैं अपने खून पीने की कभी न खत्म होने वाली भूख के लिए। इंसानी खून पीना इन्हें बहुत पसंद होता है। अब सोचने वाली बात ये है कि इंसानी खून में ऐसा क्या खास है जो ये इसके लिए तड़पते हैं। तो सच बताऊं तो इसका मुझे नहीं पता कि इंसानी खून में ही ऐसा क्या स्पेशल है, लेकिन इतना मैं आपको बता सकता हूं कि सिर्फ इंसानी खून पीकर ही ये सैकड़ों सालों तक आसानी से जिंदा रह सकते हैं, बिना कुछ खाए-पिए। बस इन्हें टाइम टू टाइम खून मिलता रहे।

इंसानी खून… अब इन सब कहानियों की शुरुआत… खून पीने वाले इन वैम्पायर की शुरुआत हुई थी यूरोप से। यूरोप में ज्यादातर लोग Christianity को मानने वाले होते हैं। इसलिए वहां मरने के बाद किसी इंसान की लाश को जलाया नहीं जाता, बल्कि जमीन में दफनाया जाता है। तो बताते हैं कि 400-500 साल पहले एक बार यूरोप के एक गांव में ऐसा हुआ कि गांव के लोग जब भी किसी लाश को कब्रिस्तान में दफनाते, तो अगली सुबह वो कब्र खुदी हुई मिलती और लाश को ताबूत से बाहर निकाला गया होता। जब लाश को चेक किया जाता तो पता चलता कि लाश की गर्दन पर दो दांतों के निशान बने होते थे। पहले-पहले तो लोगों को लगा कि हो सकता है ये किसी जंगली जानवर का काम हो, शायद जंगल से कोई जंगली जानवर कब्रिस्तान में आकर लाश खोद देता होगा। लेकिन अजीब की बात ये थी कि ये किसी जानवर का काम नहीं हो सकता था। इसकी दो वजह थीं। एक तो ये कि कोई भी जंगली जानवर जमीन तो खोद सकता था, लेकिन वो ताबूत खोलकर लाश को बाहर नहीं निकाल सकता था। ताबूत वही खोल सकता था जो ये जानता हो कि ताबूत कैसे खुलता है। दूसरा और सबसे बड़ा कारण ये था कि अगर ये किसी जानवर का काम होता तो जानवर ने लाश को भी तो नोचकर खाया जाता। लेकिन किसी भी लाश को खाए जाने या पंजों के और कोई निशान नहीं होते थे, सिवाय गर्दन पर बने उन दो निशानों के।

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धीरे-धीरे सब लोगों को समझ आने लगा कि ये किसी जानवर का नहीं, बल्कि किसी शैतान का काम है। लोगों ने पुजारियों की मदद लेना शुरू किया। दफनाने से पहले लाशों को ब्लेस करना शुरू कर दिया, जिससे कि बाद में कोई बुरी ताकत, कोई इस तरह का शैतान लाशों के साथ छेड़छाड़ न कर सके। अब यहां तक तो फिर भी ठीक था। लेकिन फिर ये घटना पूरे यूरोप के बहुत से हिस्सों में होने लगी। बल्कि अब तो न सिर्फ लाशों को बाहर निकाला जाता था, बल्कि जिंदा लोग भी मारे जाने लगे। और चाहे वो कोई मुर्दा हो या किसी जिंदा इंसान की लाश हो, हर एक बॉडी में ये same पैटर्न होता था। गर्दन पर बने दो दांतों के निशान, जिनसे बॉडी का सारा खून चूस लिया जाता था।

इसके बाद वहां के लोगों ने अपने धर्म और कल्चर के हिसाब से तमाम तरह के उपाय किए इन सब चीजों को रोकने के लिए। लेकिन वो सिलसिला जो सैकड़ों साल पहले शुरू हुआ था, वो आज भी चलता आ रहा है। आज भी आप नेट पर सर्च करोगे तो आपको ऐसे बहुत से कब्रिस्तानों के बारे में पढ़ने को मिल जाएगा, जहां आज भी रात में लाशें खोदकर बाहर निकाल दी जाती हैं। इंडिया में तो ये सब इसलिए सुनने को नहीं मिलता क्योंकि हमारे यहां हिंदू धर्म में लाश को जला दिया जाता है। इसलिए बाद में ऐसा कुछ करने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। लेकिन मैं आपको बताऊं, अभी कुछ ही साल पहले हमारे पड़ोसी पाकिस्तान से ये खबर आई थी कि वहां कोई रात में कब्रिस्तान से लाशों को बाहर निकाल लेता है। और वहां तो ये सब इतना…

अब ऐसी ही एक बहुत ही इंटरेस्टिंग स्टोरी मैं आपको बताता हूं, जो मुझे ये सब रिसर्च करते हुए पढ़ने को मिली थी। तो स्टोरी ऐसी है कि ये लड़का अल्बानिया नाम के एक देश का रहने वाला है, जो कि यूरोप में पड़ता है। और यहां ज्यादातर लोग Christianity और Islam को मानते हैं। और इन दोनों ही धर्मों में मरने के बाद लाशों को दफनाया ही जाता है। जिसकी वजह से कई बार बहुत से कब्रिस्तानों में जगह कम पड़ जाती है। तो ये लड़का बताता है कि ये लोग जिस गांव में रहते थे, वहां भी ऐसा था। कब्रिस्तान में जगह कम न पड़े, इसके लिए जब भी कब्रिस्तान में कोई लाश दफनाई जाती थी, तो पांच साल बाद फिर से उस कब्र को खोदकर लाश को बाहर निकालकर दूर जंगल में दफना दिया जाता था। जिससे कि कब्रिस्तान में नई लाशों के लिए जगह बनी रहे। सुनने में थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन हर जगह के अपने अलग-अलग कल्चर होते हैं।

तो ये करीब 1980s की बात है, जब इस लड़के के दादा की हार्ट अटैक से डेथ हो गई। तो डेथ के बाद इसके दादा की लाश को भी प्रॉपर Christian तरीके से कब्रिस्तान में दफना दिया गया। और फिर जैसा कि वहां का रिवाज था, 5 साल बाद जब उस कब्र को खोदा गया, तो लाश को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए गांव के लोगों ने देखा कि इसके दादा की लाश बिल्कुल वैसी की वैसी थी, जैसे 5 साल पहले थी, जब उनकी डेथ हुई थी। जो कि impossible था। 5 साल में तो बॉडी पूरी तरह डीकंपोज हो जाती है। लेकिन वो लाश नहीं हुई। गांव के लोगों को बहुत हैरानी हुई कि ऐसा कैसे हुआ। तो गांव के लोगों ने सोचा कि चलो, अभी हम इसे 5 साल और यहीं रहने देते हैं, और 5 साल बाद दोबारा खोदकर शिफ्ट कर देंगे। लेकिन फिर जानते हो क्या हुआ? 5 साल बाद जब लाश को फिर से निकाला गया, तो इस बार ताबूत के अंदर से वो लाश ही गायब थी।

अब इस तरह की बातें तो एकदम से फैलती हैं। तो ये बात भी पूरे इलाके में फैल गई कि लाश अपने आप कब्र से गायब हो गई है। जबकि कब्र को खोदने या छेड़े जाने का ऐसा कोई निशान नहीं था। न जाने अंदर ही अंदर वो लाश कहां गायब हो गई। लोगों को मानना था कि मरने के बाद वो किसी तरह वैम्पायर बन गया था, या शायद जीते जी ही उसके अंदर वैम्पायर का कोई अंश था, जिसकी वजह से मरने के बाद भी उसकी लाश सड़ी नहीं। और यहां से एक और चीज भी हमें समझ आती है कि हो सकता है ये वैम्पायर जिंदा लोग हो ही नहीं। इनके अंदर वैम्पायर वाले अंश हो सकते हैं, जो मुझे नहीं पता कैसे इनके अंदर आते हैं। लेकिन ये शायद मरने के बाद ही अपनी असली वैम्पायर वाली फुल फॉर्म में आते हैं। यहां सबसे अजीब जो मुझे लगी, वो ये नहीं कि वो लाश कब्र से गायब हो गई, बल्कि ये कि 5 साल बाद भी वो लाश बिल्कुल वैसी की वैसी थी।

ऐसी ही एक और केस के बारे में आपको बताऊं, तो ये अमेरिका में हुआ था। हुआ यूं था कि वहां एक orphanage था। Orphanage मतलब जहां अनाथ छोटे बच्चों को रखा जाता है। तो एक बार क्या हुआ कि उस orphanage में एक के बाद एक कई छोटे बच्चों की डेथ हो गई। अब चूंकि बच्चे अनाथ थे, आगे-पीछे कोई नहीं होता था, इसलिए बच्चों की मौतों पर किसी ने ज्यादा ध्यान भी नहीं दिया। लेकिन फिर कुछ साल बाद पता चला कि उस orphanage में काम करने वाली ही एक औरत उन बच्चों को मारा करती थी, उनका खून पीने के लिए। लेकिन प्रॉब्लम ये थी कि पुलिस के पास कोई सबूत नहीं था। कोई DNA एविडेंस नहीं था। तो पुलिस ने क्या किया कि पिछले कुछ सालों में जो बच्चे मरे थे, उन सबकी लाशों को फिर से खोदकर उनकी जांच करनी शुरू की, शायद कोई DNA एविडेंस मिल जाए। तो जानते हो, same जैसा पहली वाली स्टोरी में हुआ था, एक बच्चा जिसको मरे कई साल बीत चुके थे, उसकी लाश को जब बाहर निकाला गया, तो उसकी बॉडी बिल्कुल वैसी की वैसी थी, जैसे सालों पहले थी। मतलब बॉडी बिल्कुल भी गली नहीं थी। और उस बॉडी के गले पर दांतों के निशान तो थे ही, साथ ही साथ हाथों के निशान भी थे, जैसे किसी ने बच्चे का गला घोंटकर उसे मारा हो।

इसके बाद इस पूरे मामले में क्या हुआ, ये किसी को नहीं पता।

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वैम्पायर की एक और स्टोरी के बारे में आपको बताऊं, तो ये लड़का इंग्लैंड का रहने वाला है। और इसके जो दादा थे, वो British Navy में Lieutenant Commander के तौर पर काम करते थे। तो ये लड़का बताता है कि एक बार इसके दादा की ड्यूटी एक British Navy की S-class submarine में हुई थी। Submarine मतलब पनडुब्बी, जो पानी के नीचे रहती है। तो इसके दादा बताते थे कि उनकी submarine का जो कैप्टन था, वो एक वैम्पायर था। मतलब इसके दादा को पूरा यकीन था कि वो वैम्पायर है। लेकिन इसकी फैमिली में कोई उनकी बात पर यकीन नहीं करता था। मतलब सब इस बात को मजाक में ही लेते थे।

इसके दादा बताते थे कि उनका कैप्टन दिन के टाइम कभी submarine से बाहर नहीं निकलता था, चाहे कितना भी जरूरी काम क्यों न हो। वो कभी दिन में जब सूरज की धूप निकली होती है, तब वो बाहर नहीं निकलता था। हमेशा रात के टाइम ही बाहर आता था। और उसकी स्किन बिल्कुल सफेद थी। मतलब इंग्लैंड के लोगों की स्किन वैसे भी white ही होती है, लेकिन उसके हिसाब से भी उसकी स्किन बहुत ही ज्यादा सफेद थी, जैसे उसके अंदर खून ही न हो। और उसके अंदर गजब की ताकत थी। और उसके reflexes भी बहुत तेज थे। और वो बताते थे कि वो पता नहीं कैसे दूसरों के दिमाग पढ़ लेता था। उसे अपने आप पता चल जाता था कि सामने वाले के दिमाग में क्या चल रहा है। न उनकी पूरी यूनिट में कभी किसी ने उसे कुछ खाते या पीते देखा था। मतलब जो-जो बातें हम वैम्पायर के बारे में मूवीज में देखते-सुनते हैं न, वो सब की सब चीजें उस आदमी के अंदर थीं। और सबसे बड़ी बात कि उनके नेवल बेस से कई बार लोग अजीब ही तरीके से गायब हो जाते थे। और उनको पक्का यकीन था कि उन लोगों के गायब होने के पीछे उनके उस कैप्टन, मतलब वैम्पायर कैप्टन का ही हाथ था। लेकिन जैसा मैंने बताया, सब लोग इस बात को मजाक में ही लेते थे।

फिर क्या हुआ कि साल 2003 में इसके दादा की Navy से रिटायर होने के बाद डेथ हो गई। तो डेथ के बाद इसके घरवालों ने उनका सारा सामान वगैरह निकालकर organize करना शुरू किया कि अब क्या-क्या घर में रखना है और क्या नहीं। तो उस वक्त उनको एक फोटो मिली, उनकी यूनिट की फोटो, जो उस submarine के अंदर ही ली गई थी। फोटो में सब लोग अच्छे से smile कर रहे थे। लेकिन एक आदमी था जो smile नहीं कर रहा था। इन सबसे सबसे लंबा और तगड़ा। और उसके चेहरे पर एक अजीब सा गुस्सा था, जैसे कि वो चाहता न हो कि उसकी फोटो ली जाए। ये वही कैप्टन था, जिसके बारे में इसके दादा बताया करते थे।

अब वो फोटो ऐसी थी कि उसमें ये सब लोग एक लाइन से खड़े थे। और ठीक इनके साइड में एक mirror लगा था, जिसमें इन सबकी reflection आ रही थी। फोटो दिखने में बिल्कुल नॉर्मल थी। लेकिन फिर इन्होंने एक बहुत अजीब चीज नोटिस की। इन्होंने देखा कि उस mirror में बाकी सबकी तो reflection आ रही थी, लेकिन उस कैप्टन की reflection नहीं आ रही थी। मतलब जैसे वो वहां खड़ा ही न हो। लेकिन फोटो में तो वो साफ-साफ दिख रहा था। तब जाकर इन लोगों को यकीन हुआ कि इसके दादा जो बताते थे, वो सब सच था। वो आदमी सच में एक वैम्पायर था।

अब मैं आपको बताऊं कि इस वीडियो के लिए जब मैं वैम्पायर की कुछ रियल स्टोरीज सर्च कर रहा था, आप लोगों को बताने के लिए, तो मैंने realize किया कि इंटरनेट के ऊपर ज्यादातर जो बातें वैम्पायर के बारे में बताई गई हैं, वो सिर्फ सुनी-सुनाई बातें हैं। उनमें से ज्यादातर बातें तो रियल भी नहीं हैं। ये बात मैं इसलिए इतने पक्के तौर पर बता सकता हूं क्योंकि मैं खुद एक रियल वैम्पायर से मिल चुका हूं, online। असल में उन दिनों रियल हॉरर स्टोरीज के इतने चैनल्स नहीं होते थे। इसलिए जब पहली बार मैंने वैम्पायर के वीडियो डाले, तो बहुत से लोगों ने मुझसे कॉन्टैक्ट किया, अपनी अलग-अलग बातें बताने के लिए। चैनल पर मैंने अपना WhatsApp नंबर तोड़कर ही रखा था, जिससे कि viewers मुझे अपनी रियल स्टोरीज भेज सकें। तो एक दिन मेरे पास एक लड़की का मैसेज आया। नॉर्मल मैसेज। मेरी उससे बात हुई, तो वो मुझसे बार-बार वैम्पायर के बारे में पूछ रही थी कि वैम्पायर कहां रहते हैं, मैं कैसे उनसे मिल सकती हूं, उनके online groups कैसे मिलेंगे, ये सब। तो पहले तो मैंने भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया। लेकिन फिर उसने बताया कि वो खुद एक वैम्पायर है। और असल में वो चाहती थी कि मैं उसे बताऊं कि वैम्पायर कहां रहते हैं, जिससे कि वो उनसे मिल सके, उनकी कम्युनिटी से जुड़ सके। लेकिन मैं तो ऐसी किसी कम्युनिटी को नहीं जानता था।

अब मैं आपको उस लड़की के बारे में बताऊं, तो मैं सब कुछ तो आपको नहीं बता सकता, क्योंकि मैंने उससे promise किया था कि मैं ये सब कुछ कभी किसी को नहीं बताऊंगा। इसलिए बिना उसकी identity reveal किए जितना मैं आपको बता सकता हूं, वो सब बताऊंगा। उसका नाम तो मैं आपको नहीं बता सकता, क्योंकि मुझे उसका नाम याद ही नहीं है। वो कोई बंगाली लड़की थी, और उसका नाम भी मेरे लिए बहुत unusual सा था। लेकिन उसकी उमर ज्यादा नहीं थी। उस टाइम वो 19-20 साल की थी। कॉलेज में पढ़ती थी। और उसने मुझे अपनी बहुत सारी फोटो भी दिखाई थीं। लेकिन जैसा normally हम स्टोरीज में पढ़ते हैं कि वैम्पायर की स्किन बिल्कुल सफेद होती है, और ये सब… वो ऐसी नहीं थी। दिखने में बिल्कुल नॉर्मल, नॉर्मल स्किन कलर, जैसा बंगाली लड़कियों का होता है। लेकिन उसकी फोटो में जो सबसे अजीब चीज लगती थी, वो थी उसकी आंखें। उसकी आंखें अजीब सी ही थीं। उसकी आंखों को देखकर ही अजीब सा डर लगता था।

वो बताती थी कि उसे खून पीना पसंद है, इंसानी खून पीना। और वो शायद medical का ही कोई कोर्स कर रही थी, जिसमें उसे blood मिलता रहता था। उसने मुझे blood packet हाथ में लिए हुए फोटो भी भेजी थी। वो बताती थी कि उसे नॉर्मल खाने-पीने की भूख नहीं लगती। खाए-पिए बिना तो वो कई-कई दिनों तक रह सकती थी। लेकिन उसे craving आती थी खून पीने की, इंसानी खून। ऐसा नहीं था कि वो सिर्फ इंसानी खून ही पीती थी। जानवर का खून भी पी सकती थी। लेकिन वो बताती कि जानवरों का खून बहुत गंदा होता है। जब कई-कई हफ्तों तक इंसानी खून न मिले, तो वो जानवरों का खून पी लेती थी, मजबूरी थी। लेकिन उसकी भूख सिर्फ इंसानी खून से ही शांत होती थी।

अब जाहिर है, जब पहली बार मैंने ये सब बातें उससे सुनी, तो मुझे तो यही लगा कि ये पक्का झूठ बोल रही है। क्योंकि तब तक मैं बहुत ऐसे लोगों से बात कर चुका था, जो पता नहीं क्या-क्या बताते थे। इसलिए यकीन करना मुश्किल था। लेकिन फिर अगले कई हफ्तों तक उसने बहुत सी ऐसी बातें बताई, जिसके बाद मुझे यकीन हो गया कि ये लड़की झूठ नहीं बोल रही। उस लड़की को खून पीना तो पसंद था ही, लेकिन इसके साथ-साथ उसके अंदर कुछ ऐसी powers भी थीं, जो normally किसी इंसान में नहीं होतीं। मतलब वो किसी भी इंसान की आंखों में देखकर ये पता लगा लेती थी कि वो इंसान कैसा है। बल्कि जब उसे गुस्सा आता था, तो वो सामने वाले की आंखों में देखकर अपने thoughts से उसे हार्ट अटैक भी दे सकती थी। वो धूप में बाहर निकलती तो थी, लेकिन उसे धूप बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होती थी। वो बताती कि धूप में उसकी स्किन जलने लगती है।

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अब ये सब पता चलने के बाद सबसे पहला सवाल तो मेरे मन में यही आया कि ये वैम्पायर बनी कैसे? मतलब जैसा हम फिल्मों में देखते हैं न, एक वैम्पायर दूसरे को काट ले, तो वो दूसरा भी वैम्पायर बन जाता है। तो मैंने उससे भी पूछा कि तुम्हारे साथ भी ऐसा कभी कुछ हुआ था क्या? वो बोलती नहीं, ऐसा कभी कुछ नहीं हुआ। बल्कि उसकी फैमिली के जो बाकी लोग थे, वो बिल्कुल नॉर्मल थे। उनके अंदर ऐसा कुछ नहीं था। मैंने उससे पूछा कि हो सकता है बचपन में कभी ऐसा कुछ हुआ हो, मतलब किसी वैम्पायर ने तुमको काटा हो। तो वो बोलती कि नहीं, जहां तक उसे पता है, ऐसा कभी कुछ नहीं हुआ। बस अपने आप उसके अंदर ये वैम्पायर वाली qualities आ गई थीं।

वो बताती कि कई बार जब उसे बहुत दिनों तक blood नहीं मिलता, तो वो अपने आप को control नहीं कर पाती थी, और अपनी फैमिली के लोगों को ही काट लेती थी। उसे ये दो fangs भी थे। लेकिन वो जब भी किसी को यूं काटती, तो उस काटने का जख्म होता था, वो बहुत जल्दी भर जाता था, जैसे कभी कुछ हुआ ही न हो। वो बताती कि हर एक इंसान के खून की अलग खुशबू होती है। वो किसी भी इंसान को देखकर उसके खून को सूंघ सकती थी। कुछ लोगों का खून बहुत tasty होता, तो कुछ लोगों का इतना tasty नहीं होता था।

मेरी कई महीनों तक उससे बात होती रही। लेकिन हमेशा मुझसे बोलती कि मैं उसके बारे में किसी को न बताऊं। क्योंकि इससे उसकी जान को खतरा हो सकता था। वो बताती कि ऐसे बहुत से लोग हैं, जो उसके जैसे लोगों की जान पीछे पड़े होते हैं। मतलब हम नॉर्मल लोगों को तो इन सब चीजों का पता नहीं होता। लेकिन underground क्या-क्या चीजें चलती हैं, उसके जैसे लोगों को ढूंढ-ढूंढकर खत्म किया जाता है।

अब ये जो खून पीने वाली बात है न, बहुत से लोगों को लग सकता है कि ये कोई बीमारी होगी। इनफैक्ट ऐसी एक बीमारी होती भी है, जिसको Renfield’s syndrome बोला जाता है। इस बीमारी में इंसान को खून पीने की बहुत जबरदस्त इच्छा होती है। लेकिन इस लड़की को… मुझे नहीं लगता इसको ये बीमारी थी। कोई खून पीने के साथ-साथ इसके अंदर बहुत सी ऐसी चीजें थीं, जो बिल्कुल superpowers जैसी थीं।

अब जैसा कि मैंने बताया न कि ये वैम्पायर और खून पीने वाले शैतानों की स्टोरीज दुनिया भर के देशों और कल्चर्स में हमेशा से सुनने को मिलती रही हैं। इंडिया में हमारे यहां इन खून पीने वाले शैतानों को पिशाच कहा जाता है। लेकिन जहां तक मेरी knowledge है, पिशाच इन traditional वैम्पायर जैसे नहीं होते। मतलब ये खून तो पीते हैं, लेकिन ये इंसानों के रूप में नहीं होते। अगर आपके ऊपर कोई पिशाच लग जाए, तो वो और कुछ आपको नहीं करेगा, बस अंदर ही अंदर वो आपका खून पीता रहेगा। ऐसी हालत कर देगा कि आपकी बॉडी के अंदर खून बनना ही बंद हो जाएगा। क्योंकि खून बनते ही वो पी जाएगा। ऐसे लोगों को चाहे कितना भी खून चढ़ाया जाए, इनकी बॉडी में खून कभी पूरा नहीं हो पाता। क्योंकि पिशाच लगातार पीता रहता है। और पिशाच कितने खतरनाक होते हैं, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि हनुमान चालीसा में भी पिशाच के बारे में बोला गया है।

तो अब आखिर में सवाल यही आता है कि वैम्पायर असल में क्या होते हैं? क्या ये कोई बीमारी है या बस सुनी-सुनाई बातें हैं? तो इस पर मेरी opinion ये है कि ये शैतान सच में होते हैं। ये कोई सुनी-सुनाई बातें नहीं हैं। मेरे पास इस बात का proof तो नहीं है, लेकिन मैं ये मानता हूं कि इंसानी खून के अंदर कुछ ऐसी magical शक्तियां हैं, जिनकी वजह से ये लोग इंसानी खून पीकर सैकड़ों सालों तक जिंदा और ताकतवर बने रहते हैं। इनफैक्ट एक fun fact आपको बताऊं कि आज भी इतनी advanced medical science होने के बाद भी हम artificial blood नहीं बना सके हैं। Blood सिर्फ इंसानी बॉडी ही produce कर सकती है। और जैसा फिल्मों में दिखाते हैं कि एक वैम्पायर अगर दूसरे इंसान का खून पी ले, तो वो भी वैम्पायर बन जाता है, ये बात भी कुछ हद तक सही हो सकती है। लेकिन सिर्फ तब, जब सामने वाला अपनी मर्जी से इनको खून देने को तैयार हो।

और जैसा कि मैंने पहले बताया, इन वैम्पायर के भी अपने secret groups होते हैं, communities होती हैं। इनफैक्ट deep web पर भी आप लोग सर्च करोगे, तो आपको ऐसी communities मिलेंगी, जहां ये लोग एक दूसरे से मिलते हैं। और लोग voluntarily इनको अपना blood भी donate करते हैं। और इनको सिर्फ 2 तरीकों से ही मारा जा सकता है। या तो इनका सिर इनके धड़ से अलग करके, या फिर इनके दिल में silver के खंजर से वार करके। बस। इसके अलावा इनको किसी तरीके से खत्म नहीं किया जा सकता। बांधा जा सकता है, लेकिन मारा नहीं जा सकता। और इन वैम्पायर की भी अपनी hierarchies होती हैं। पहले छोटे वैम्पायर, फिर बड़े वैम्पायर। और दुनिया के सबसे बड़े वैम्पायर का नाम तो आपने सुना ही होगा – Dracula। जिसके बारे में मैं आपको अगले वीडियो में बताऊंगा।

अगर वैम्पायर के बारे में आपको कुछ पता है, तो नीचे कमेंट करके जरूर बताना। best comments को मैं अगले वीडियो में जरूर read करूंगा।

जाने से पहले पुरानी दिल्ली के एक भूतिया घर की ये एक बहुत ही मजेदार स्टोरी सुनना न भूलें।

बहुत जल्द आऊंगा एक और मजेदार वीडियो के साथ। आज के लिए इतना ही… goodbye।

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