3 सच्ची भूतिया कहानियाँ

आत्माओं का आतंक - भूतो और चुडैलों की सच्ची कहानियाँ

मेरा नाम सूरज है। मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। यह बात 3 साल पहले की है। तब मैं 19 साल का था। उन दिनों मैं पार्ट-टाइम जॉब करता था, जो शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक होती थी। मेरे साथ मेरे दो दोस्त भी थे – अमन और शोएब। एक दिन रात में हमें जॉब से वापस आते हुए देर हो गई, क्योंकि उस दिन हमारी कंपनी की कैब नहीं आई थी। इसलिए हम तीनों पैदल-पैदल ही आ रहे थे।

हम लोग जिस रास्ते से आ रहे थे, उस रास्ते में एक कब्रिस्तान पड़ता था, जो बहुत दिनों से बंद पड़ा था। मैं उस रास्ते से नहीं जाना चाहता था, लेकिन अमन और शोएब ने मुझे मजबूर किया तो मैं वहाँ से आने को तैयार हो गया। हम चलते-चलते आ रहे थे। रास्ते पर लगी स्ट्रीट लाइट्स से हमारी तीनों की परछाइयाँ बहुत लंबी नजर आ रही थीं। मैंने मज़ाक-मज़ाक में अपने दोस्तों से कहा, “देखो, मैं तुमसे लंबा हो गया हूँ।” हम लोग मजे करते हुए वहाँ से आ ही रहे थे कि कुछ देर बाद हमने देखा कि वहाँ तीन नहीं बल्कि पाँच परछाइयाँ चल रही थीं।

मुझे लगा शायद कोई हमारे पीछे चल रहा है, लेकिन जब मैंने पीछे मुड़कर देखा तो वहाँ कोई नहीं था। मैंने अपने दोस्तों की तरफ देखा तो देखा कि वे दोनों पहले ही डर के मारे काँप रहे थे। और तभी हम तीनों बिना कुछ बोले वहाँ से भागने लगे। भागते-भागते हम मेन रोड तक पहुँच गए। लेकिन तभी हमने ध्यान दिया कि शोएब तो पीछे ही रह गया है। हम दोनों बहुत डरे हुए थे, लेकिन हमने फैसला किया कि हम उसे लेकर आएँगे। हमने लंबी साँस ली और उसे लेने के लिए पीछे चले गए।

लेकिन तब हमने वहाँ जो देखा, वह देख कर हमारी आँखें फटी की फटी रह गईं। हमने देखा कि शोएब वहाँ बेहोश पड़ा था और दो बूढ़ी औरतें, जिनके बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था, शोएब के पास खड़ी थीं। उनमें से एक औरत की पूरी बॉडी पर टाँके लगे हुए थे। उसने हमारी तरफ देखा, और तोतली आवाज में बोली, “मेरा सिर ठीक से क्यों नहीं जलाया…” यह बोल कर उसने मुझे एक थप्पड़ मारा। हम दोनों भी वहीं बेहोश हो गए।

सुबह जब हमें होश आया तो देखा कि हम तीनों पुलिस स्टेशन में थे। पुलिस वाले ने हमसे कहा, “इतनी पीते क्यों हो जब होश नहीं रहता।” पुलिस को देख कर मैं तो बहुत खुश हो गया। हमने उन्हें सारी बात बताई। तो एक पुलिस वाला हमारे साथ उसी जगह पर गया। वहाँ पहुँचे तो हमें देख कर वहाँ कई लोग इकट्ठा हो गए। बातों-बातों में एक आदमी ने बताया कि कल एक औरत को पास के श्मशान घाट में जलाया गया था, लेकिन उसका सिर ठीक से नहीं जला। इसलिए आज उसे फिर से जलाया जाएगा। तब जाकर पुलिस वाले को हमारी बात पर यकीन हुआ। फिर हम लोग अपने-अपने घर आ गए और उस रास्ते से फिर कभी न आने की कसम खा ली।

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मेरा नाम विजय सिरिया है। मैं महाराष्ट्र के नागपुर का रहने वाला हूँ। मैं जो घटना आपको बताने जा रहा हूँ, यह उतनी डरावनी तो नहीं है, लेकिन यह बिल्कुल सच्ची है। यह बात उन दिनों की है, जब मैं बहुत छोटा था। हमारा घर दो मंजिल का था। नीचे वाले फ्लोर पर मैं और मेरे मम्मी-पापा रहते थे और ऊपर वाले फ्लोर पर हमारे नए किरायेदार रहते थे। उनकी नई-नई शादी हुई थी। मम्मी बताती थीं कि वो किरायेदार बहुत अच्छे थे और हमारे परिवार का उनसे अच्छा रिश्ता बन गया था।

लेकिन धीरे-धीरे वह आदमी घर में शराब पीकर आने लगा। दोनों में रोज-रोज झगड़े होने लगे। कभी-कभी मारपीट तक की नौबत आ जाती थी। हम लोग उनके रोज-रोज के झगड़ों से बहुत परेशान हो गए। एक दिन मम्मी ने उन्हें घर खाली करने के लिए कह ही दिया। फिर एक दिन मेरे मम्मी-पापा मेरी नानी के घर गए हुए थे। हमारे पीछे से उन दोनों में झगड़ा बहुत बढ़ गया और उस आदमी ने अपनी पत्नी की बुरी तरह से पिटाई कर दी। इस बात से गुस्से में आकर उसकी पत्नी ने खुद को आग लगा ली। उसकी मौत हो गई।

इस घटना के बाद कुछ दिनों तक घर में सबकुछ ठीक रहा। लेकिन फिर करीब 6 महीने बाद घर में अजीब चीजें होने लगीं, जैसे कि रात में किसी के सीढ़ियों पर चलने की आवाज आती। किसी के बात करने की आवाज सुनी जाती। सुबह घर में खिले हुए गुलाब के फूल शाम तक मुरझा जाते थे। लेकिन यह सब केवल तब होता था जब मेरे पापा घर में नहीं होते थे।

मेरे पापा रेलवे में नौकरी किया करते थे और हर 15 दिन में उनकी शिफ्ट बदल जाती थी। 15 दिन उनकी डे शिफ्ट रहती थी और 15 दिन नाइट शिफ्ट। एक रात, जब पापा नाइट शिफ्ट में थे, मम्मी ने मुझे पालने में सुला दिया। अचानक सोते हुए मम्मी को मेरे रोने की आवाज सुनाई दी। मम्मी ने उठकर देखा तो मैं पालने में था ही नहीं। मम्मी बहुत घबरा गईं क्योंकि उन्होंने तो मुझे पालने में ही लिटाया था।

लेकिन मेरे रोने की आवाज आ रही थी। मम्मी ने ध्यान से सुना तो पता चला कि मेरी आवाज ऊपर वाले कमरे से आ रही थी। लेकिन यह कैसे हो सकता था, क्योंकि उस कमरे में तो ताला लगा था। मम्मी ने ऊपर जाकर देखा तो देखा कि मैं ऊपर वाले कमरे के सामने ही पड़ा हुआ था। मम्मी बहुत डर गईं। और सुबह पापा के आते ही मम्मी ने सारी बात पापा को बताई। तो पापा ने पास में ही रहने वाले एक पंडित को घर में बुलवाया और उनसे घर की शांति करवाई। पंडित जी ने बताया कि वह एक अच्छी आत्मा है और आपको कोई नुकसान नहीं पहुँचाएगी। बस उसको आपका बेटा बहुत पसंद आ गया था। और इसी वजह से वह यहाँ पर रुक गई थी।

उस दिन से आज तक हमारे घर में कुछ भी गलत नहीं हुआ।

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ये बात तब की है जब मैंने 10वीं कक्षा पास की थी। मुझे बैडमिंटन खेलना बहुत पसंद है और उन दिनों मैं हर रोज बैडमिंटन खेलने जाया करती थी। तो रोज़ की तरह एक दिन बैडमिंटन खेलते हुए मैंने देखा कि एक औरत बहुत देर से खड़ी मेरी तरफ देखे जा रही थी। फिर कुछ देर बाद उस औरत ने मुझे आवाज दी और मुझे अपने पास बुलाया। मैं उसके पास गई तो वो बोली, “तू बहुत सुंदर दिखती है… इसीलिए एक लड़का तुझे बहुत पसंद करता है।”

उसकी बात सुनते ही मैंने कहा, “अच्छा, कौन है वो लड़का?”
उसने कहा, “तू उसे नहीं जानती है।”
तो मैंने पूछा, “तो फिर वो मुझे कैसे जानता है?”
वो बोली, “तू रोज जब यहाँ बैडमिंटन खेलने आती है तो वो तुझे रोज उस चाय की कैंटीन से देखता है।” ये बोलते हुए उसने उस कैंटीन की तरफ हाथ करके इशारा किया। वो कैंटीन एक बस डिपो के बिलकुल कोने में बनी थी। उस बस डिपो में बसें खड़ी रहती थीं और वो कैंटीन बिलकुल कोने में थी। इसीलिए सामने से जाते हुए उस कैंटीन पर नज़र पड़ती भी नहीं थी। वो कैंटीन वैसे भी नई-नई खुली थी, मुश्किल से एक महीना हुआ था। और उसमें सिर्फ वहाँ के कुछ ड्राइवर और कंडक्टर ही चाय पीने जाया करते थे।

वो औरत बोली कि वो लड़का तुझे उसी कैंटीन से देखता है। मैंने उसकी बात सुनी और ज्यादा ध्यान न देते हुए वापस खेल में लग गई। साथ ही मैं बता दूं कि मेरे घर से बाजार जाते हुए वो कैंटीन रास्ते में ही पड़ती थी।

फिर कई दिन बाद, एक दिन सुबह-सुबह मैं बाजार से दूध लेने जा रही थी। तभी उस औरत ने मुझे आवाज लगाई। वो उसी कैंटीन के बाहर खड़ी थी। उस वक्त उस औरत से बात हुए मुझे कई दिन हो गए थे, इसीलिए मैंने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और उसकी आवाज सुनकर मैं कैंटीन के पास चली गई।

मैंने उससे पूछा, “क्या हुआ आंटी, क्या काम है आपको?”
तो वो बोली, “तू कहाँ जा रही है?”
मैंने उसे बताया, “मैं दूध लेने बाजार जा रही हूँ।”
तो उसने मुझे कहा, “तू कैंटीन के अंदर आ जा। मुझे भी कुछ सामान मंगवाना था, तू बाजार जा रही है तो मेरा सामान भी लेते आना।”

उसने कहा क्या लाना है, ये बोलते हुए मैं उस कैंटीन में चली गई। वो कैंटीन बड़ी थी और वहाँ पर चाय पीने के लिए कुछ टेबल रखे हुए थे। तो वो बोली, “तू बैठ जा, मैं पैसे लेकर आती हूँ।”

उस वक्त उस कैंटीन के अंदर एक और आदमी था, जो बहुत ही डरावना लग रहा था। उस आदमी को देखकर लग रहा था कि उसकी उम्र लगभग 35 से 40 साल के आसपास होगी।

वो औरत मुझे बोली, “मैंने जिस लड़के के बारे में तुझसे बात की थी ना, ये वही लड़का है और ये इसी कैंटीन में सफाई का काम करता है। ये तुझे बहुत प्यार करता है। बस तू एक बार इस लड़के की बात मान जा। ये लड़का तुझे सब कुछ लाकर देगा, तुझे पैसे देगा, तुझे कपड़े देगा, तुझे खाने का सामान लाकर देगा, तुझे घूमाने भी लेकर जाएगा और तुझे एक नया मोबाइल भी लाकर देगा।”

पहले तो मैंने उस आदमी पर बिलकुल ध्यान नहीं दिया, पर जब उस औरत ने ये सारी बातें बताईं तो मैंने उसकी तरफ देखा। और जैसे ही मैंने उसकी तरफ देखा, उस औरत ने बहुत जल्दी-जल्दी में उस आदमी से कहा, “मैं शटर गिरा रही हूँ, तू और यही कर ले। मैं यहाँ किसी को आने नहीं दूँगी। तुझे जिसके साथ सेक्स करना था ना, तो जल्दी से कर ले। तब तक, मैं यहाँ पहरा दे रही हूँ।”

ये सुनते ही मेरे दिमाग ने तो एकदम से काम करना ही बंद कर दिया। मेरी पूरी शरीर सुन्न पड़ गई डर के कारण और मैं वहीं खड़ी-खड़ी काँपने लगी। न मैं चिल्ला पा रही थी और न ही मैं हिल पा रही थी। मेरे पैर तो एकदम से वहीं जम गए। जिंदगी में पहली बार मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक रही है और मैं बस अभी गिरने वाली हूँ। मैं रो भी नहीं पा रही थी।

एक तरफ वो आदमी खड़ा था और बाहर वो औरत खड़ी थी ताकि मैं भाग न सकूँ। वो आदमी मेरे पास आया और उसने मेरा हाथ बहुत जोर से पकड़ लिया। और वो औरत ने तो आधे शटर गिरा ही दिए थे। पर इसके पहले कि वो पूरा शटर गिराती, मुझे तभी एक आइडिया आया। मैंने तुरंत उस आदमी के हाथों को अपने दाँतों से काट लिया, जिससे उसने मुझे पकड़ा हुआ था। और जैसे ही उसने दर्द से मेरा हाथ छोड़ा, मैंने उसे जोर से धक्का दिया और वो उन टेबलों पर गिर पड़ा। जिसके कारण उसे वो टेबल भी लग गईं और उसका सारा ध्यान उस दर्द पर चला गया।

और मैं उस आधे खुले हुए शटर से निकलकर बाहर आ गई और वहाँ से भाग गई।

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