भूतो और चुडैलो की खौफ्फ्नाक सच्ची कहानियाँ

मेरा नाम सुरैया फातिमा है और मैं हैदराबाद की रहने वाली हूँ। यह बात काफी समय पहले की है। तब मेरे पापा दुबई में नौकरी करते थे। हमने अट्टापुर में एक नया घर लिया था। मैं अपनी मम्मी और बहनों के साथ उस घर में रहने गई थी। उस घर में वह हमारी पहली रात थी। हम सब लोग रात में हॉल में सो रहे थे। रात के करीब 2.30 बजे अचानक मेरी आँख खुल गई। मैं पानी पीने के लिए बाथरूम की तरफ जा रही थी। तभी अचानक मुझे बाथरूम से कुछ अजीब आवाजें सुनाई दीं। बाथरूम का फ्लश अपने आप चल पड़ा, जबकि उस वक्त घर के सभी लोग सो रहे थे। मैं बहुत डर गई और जल्दी से मम्मी को उठाया। उस वक्त सबको वहाँ कोई और भी मौजूद होने का एहसास हुआ, लेकिन कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। सब परेशान हो गए। अगले कई दिनों तक ऐसा ही चलता रहा।

मेरा एक कज़िन घर के पास ही रहता था। वह जब भी हमारे घर के पास से गुजरता तो उसे लगता जैसे चूड़ियों और पायल की आवाज उसका पीछा कर रही हैं। वह भी बहुत डर जाता था। जब हम वह घर ले रहे थे, तो कई लोगों ने भी हमें वहाँ जाने से मना किया था। लोग बताते थे कि कोई भी उस घर में एक-दो महीने से ज्यादा नहीं रह पाता। लेकिन हमने उन बातों पर यकीन नहीं किया और हमें वो घर इतना पसंद आ गया था कि हमने वो ले लिया।

फिर धीरे-धीरे उस घर में होने वाली अजीब चीज़ें बढ़ती चली गईं। कभी कोई घर के दरवाजे पर मारकर भाग जाता, कभी अपने आप घर की लाइट बुझ जाती। मुझे अपने घर के सामने के फ्लाईओवर पर कोई कफन में लिपटा हुआ दिखाई देता। सब लोग बहुत डर गए थे। हमारे घर के सामने से भी कोई निकलना पसंद नहीं करता था। लेकिन यह सब तो अभी बस शुरुआत थी। फिर एक दिन हमने घर के पीछे की तरफ झाड़ियाँ साफ करवा कर वहाँ पिलर लगाने के गड्ढे खुदवा दिए।

लेकिन उस दिन से तो हमारा जीना हराम हो गया। रात में घर का दरवाजा जोर-जोर से भड़भड़ाने लगता, लाइट अपने आप चली जाती। हमारे घर के सामने कुत्ते पूरी रात रोते रहते। घर के पीछे वाले रास्ते पर हमें हमेशा पायल और चूड़ियों की आवाज सुनाई देती। हमारा रात में सोना भी मुश्किल हो गया था। हम डर के मारे रात में कुरान की आयतें चला देते थे। वह आयत चलाने से वे कुत्ते घर से करीब 40 कदम दूर जाकर रोते और पायल की आवाज भी आना बंद हो जाती थी। यह सब रोज़ का हो गया था।

एक रात करीब 11 बजे, मैं खिड़की के पास वाले सोफे पर बैठी हुई थी। उस वक्त खिड़की बंद थी। तभी खिड़की जोर-जोर से बजने लगी। चूड़ियाँ पहने कोई हाथ खिड़की को जोर-जोर से बजा रहा था। मैं बहुत ज्यादा डर गई। वहाँ तेज हवाएँ चलने लगीं। जैसे वह वहाँ आ गई हो। मैं उसी वक्त चीख मारकर मम्मी के पास भाग गई। मेरी हालत देखकर मम्मी को बहुत गुस्सा आया। मम्मी बाहर आईं और एक हाथ में कुरान ए मजीद लेकर हमें पीछे कर गुस्से से चिल्लाईं। बोलीं, “अगर तुझमें हिम्मत है तो इसी वक्त मेरे सामने आ। बच्चों को क्या डराती है।” फिर मम्मी ने कुरान को साइड में रखा और उसे गालियाँ देने लगीं। उन्होंने कहा, “आज के बाद अगर तूने मेरे घर का रुख किया, तो मैं तुझे चीर दूंगी। अगर आज के बाद तूने मेरे घर आने वाले मेहमानों को डराया, तो मैं तुझे नहीं छोड़ूँगी। तू मेरे घर से दस कोस दूर चली जा।”

मम्मी के इतना कहते ही वहाँ जो तेज हवाएँ चल रही थीं, वो अचानक से बंद हो गईं। वह शायद वहाँ से जा चुकी थी। फिर हम सब लोग सोने चले गए। लेकिन फिर रात के करीब 2.30 बजे, सोते-सोते मम्मी को अपने सीने पर वजन महसूस होने लगा। वह नींद में ही छटपटाने लगीं। हमने जल्दी से कुरान उठाकर मम्मी के सीने पर रख दी। और तभी मम्मी नींद से जाग गईं। मम्मी ने बताया कि वह औरत बिल्कुल काली थी और वह नींद में उनके सीने पर आकर बैठ गई। और बोली, “बता तू क्या कह रही थी?” और इतना कहकर उसने मेरा गला दबाने की कोशिश की। अच्छा हुआ, तुम लोगों ने मेरे सीने पर कुरान रख दी। नहीं तो वह नींद में ही मुझे मार डालती।

इस तरह मम्मी की जान बची। उस रात के बाद हमने वो घर छोड़ने का फैसला कर लिया। कुछ दिन बाद जब हम वह घर खाली कर रहे थे, तो वहाँ रहने वाली एक औरत ने बताया कि काफी समय पहले उस गली में एक प्रेस करने वाली गरीब औरत रहा करती थी। वह वहीं बिल्डिंग में मजदूर का काम भी करती थी। एक बार उसे 5 आदमियों ने जबरदस्ती बिल्डिंग में ले जाकर उसका रेप किया और फिर उसे बिल्डिंग की छत से फेंक दिया। तभी से उसकी आत्मा उस गली में रहती है और वहाँ के लोगों को तंग करती है। नए घर में जाने के बाद एक रात मुझे सपना आया कि वह औरत हमारे पूरे घर में भटक रही है। उसका रंग बिल्कुल काला था और उसने पायल और चूड़ियाँ भी पहन रखी थी। वह सच में बहुत डरावनी थी। उस दिन के बाद हमारा सामना उस औरत से फिर कभी नहीं हुआ।

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मैं जो कहानी बताने जा रहा हूँ वो बिल्कुल सच है… और ये सब बिल्कुल मेरे घर के पास ही हुआ था। हमारे घर के पास एक प्राइमरी स्कूल हुआ करता था। वो स्कूल ज़्यादा बड़ा तो नहीं था, लेकिन उसकी बिल्डिंग के अंदर एक खाली मैदान बना हुआ था। साथ ही उस स्कूल में एक घर भी था। और उस स्कूल की प्रिंसिपल वहीं स्कूल में रहती थीं। वो प्रिंसिपल बहुत बूढ़ी थीं और वहाँ अपने कुछ नौकरों के साथ रहती थीं। ये बात करीब 20 साल पहले की है। उन दिनों वो स्कूल बहुत अच्छा चला करता था… लेकिन फिर कुछ समय बाद स्कूल की प्रिंसिपल की मौत हो गई। जिसके बाद उस स्कूल की प्रॉपर्टी पर काफी विवाद हुआ और कोर्ट केस भी चला। फिर साल 2012 में उस जमीन का केस सॉल्व हो गया और वो जमीन सरकार को दे दी गई।

कुछ समय बाद सरकार ने उस जमीन पर ज्वॉइंट वेंचर में कई बिल्डर्स को सोसायटी बनाने का काम दिया। उनमें से एक बिल्डर मेरे भाई का बहुत अच्छा दोस्त था। स्कूल और वहाँ बने पार्क को पूरी तरह खाली करवा कर तोड़ दिया गया। लेकिन वहाँ काम करने वाले मजदूर बताते थे कि वहाँ काम करते हुए उन्हें अजीब-अजीब महसूस होता है। जैसे कोई उन्हें देख रहा हो। कई मजदूरों ने बताया कि उन्हें अपने चेहरे या हाथों पर किसी की गर्म सांसें भी महसूस होती थीं।

बिल्डर को भी इस बारे में बताया गया, लेकिन उन्होंने सब अनसुना कर दिया। एक शाम विद्यालय की बिल्डिंग गिराने के बाद प्रिंसिपल के उस घर को तोड़ने का काम शुरू किया गया। और वो घर तोड़ने का काम मेरे भाई के दोस्त का था। उस दिन उन्होंने देर रात तक वहीं रुक कर वो घर तुड़वाने का फैसला किया, ताकि अगले दिन फिर से काम आगे बढ़ाया जा सके। लेकिन फिर उस रात उनके साथ कुछ ऐसा हुआ जो वो कभी नहीं भूल सके। उन्होंने बताया कि घर तोड़ते हुए उन्हें अजीब-अजीब आवाज़ें आ रही थीं, जैसे कोई दर्द में कराह रहा हो। वहाँ काम करते हुए सबको घुटन महसूस हो रही थी।

घर तोड़ते हुए प्रिंसिपल का बेडरूम आ गया। लेकिन उस कमरे में जाते ही दो मजदूरों को उल्टी होने लगी। वो दोनों बाहर की तरफ दौड़ गए। बाकी के मजदूर अपना काम कर रहे थे और भाई का दोस्त भी वहाँ था। तभी अचानक से वहाँ साइड में लगी लाइट की तार हिलने लगी। जैसे ही उन्होंने वो तार फिर से लगाई, उनके होश उड़ गए। उन्होंने देखा कि उनके सामने एक बूढ़ी औरत खड़ी थी। उसका चेहरा पूरी तरह बालों से ढका हुआ था।

तभी भाई के दोस्त ने उससे पूछा, “अम्मा, आप यहाँ कैसे आ गईं?” लेकिन वो औरत कुछ नहीं बोली। मेरे भाई का दोस्त फिर से गुस्से में पूछने लगा, “आप कौन हैं? यहाँ क्यों आई हैं?” इतना कहते ही वो औरत ज़ोर से चिल्लाई, “मैं यहाँ रहती हूँ। ये मेरा घर है। तुम इसे क्यों तोड़ रहे हो?” भाई ने उसका चेहरा देखा तो वो भी डर के मारे चीखने लगे। दरअसल, वो वही प्रिंसिपल थीं जो मर चुकी थीं। उनका चेहरा ऐसा लग रहा था जैसे जल गया हो और उनकी आँखें बिल्कुल सफेद थीं।

मेरे भाई ने उस वक्त सभी को कहा, “भागो यहाँ से!” और वो सब लोग भाग कर वहाँ से बाहर चले गए। लेकिन वहाँ से भागते हुए उन्हें लग रहा था जैसे कोई उनके पीछे भाग रहा हो। अगले दिन सभी बिल्डर्स ने मिलकर उस औरत की भतीजियों को बुलाया तो पता चला कि उन्होंने अब तक उसका श्राद्ध ही नहीं किया था। तब सभी बिल्डर्स ने मिलकर वहाँ पूजा करवाई और उस औरत का पिंड दान भी करवाया।

आज उस जगह पर पूरी सोसायटी बन चुकी है और वहाँ लोग भी रहते हैं। लेकिन आज भी उस जगह पर जाते हुए दम सा घुटने लगता है।

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मेरा नाम रोहन सिंह है। मैं जो कहानी आपको बताने जा रहा हूँ वो दिल्ली के करावल नगर की है। ये कहानी छोटी सी है लेकिन सच है। ये सब मेरे दोस्त के साथ हुआ था और इसे मैंने और मेरे स्कूल के सभी लोगों ने देखा था।

मेरे दोस्त का नाम मोहित है। तब हम दोनों 11वीं क्लास में पढ़ा करते थे। हमारे स्कूल का नाम एमआरएल सीनियर सेकेंडरी स्कूल है। एक दिन बातों ही बातों में मेरे दोस्त ने मुझे बताया कि उसके ऊपर किसी चुड़ैल का साया है। उसने कहा कि अगर मुझे स्कूल में कभी कुछ हुआ तो मेरे घरवालों को फोन करवा देना। फिर कुछ दिन बाद एक दिन स्कूल में हमारी मैडम पढ़ा रही थीं। तभी अचानक मोहित मुझे बोला, “जल्दी मेरे घर फोन करवा दे। मैं बोला क्यों? क्या हुआ?” तो उसने कहा, “मेरी छाती भारी हो रही है। वो आ रही है।”

ये सब सुनकर मैंने हमारी मैडम को सारी बात बताई। उसी वक्त प्रिंसिपल को बुलाया गया। प्रिंसिपल ने भी मोहित को उठाने की कोशिश की लेकिन वो हिल भी नहीं रहा था। तभी वह बेंच के नीचे जाकर छिप गया और ज़ोर-ज़ोर से दाँत पीसने लगा। किसी तरह, पाँच टीचर्स ने मिलकर उसे बाहर निकाला। मोहित खूब ज़ोर-ज़ोर से किसी जानवर की तरह गुर्रा रहा था। फिर उसने अपनी छाती पर ज़ोर-ज़ोर से घूंसे मारने शुरू कर दिए।

फिर टीचर्स उसे पास के हनुमान मंदिर में लेकर गए, जहाँ जाकर वो सामान्य हो गया। और उस दिन ये सब होते हुए हमने अपनी आँखों से देखा था।

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मेरा नाम रुपेश है, और मैं छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूँ। हमारे घर में मैं, मम्मी-पापा, मेरा छोटा भाई और मेरी नानी, यानी कि मेरी मम्मी की मामी रहा करते थे। हमारे पड़ोस में ही मेरे मामा-मामी रहते हैं। उनके तीन बच्चे भी हैं। हमारा एक कुत्ता भी है। यह बात कुछ समय पहले की है। सब कुछ सामान्य चल रहा था। मेरे 10वीं के बोर्ड परीक्षा चल रहे थे। मेरी मम्मी और उनकी मामी के आपस में कुछ ज्यादा नहीं बनती थी।

एक दिन मेरी नानी, मतलब मेरी मम्मी की मामी, सुबह-सुबह घर का काम कर रही थीं। तभी अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। तो वह आराम करने के लिए लेट गईं। थोड़ी देर बाद जब उनके पति उनको देखने गए, तो वह उठ ही नहीं रही थीं। मैं तब अपने रूम में ही था। मेरी मम्मी ने आकर बताया कि नानी की तबीयत बहुत खराब हो गई है। हमने तुरंत एक ऑटो बुलाया और नानी को लेकर अस्पताल चले गए।

अस्पताल वालों ने पहले तो उन्हें भर्ती करने से मना कर दिया, लेकिन फिर उन्होंने हमें दूसरे अस्पताल ले जाने को कहा। दूसरे अस्पताल गए तो वहाँ डॉक्टर ने उन्हें चेक कर बताया कि उनकी मौत हो चुकी है। यह सुनकर हम सब सदमे में आ गए, क्योंकि यह सब बहुत अचानक हुआ था। डॉक्टर ने बताया कि उन्हें साइलेंट हार्ट अटैक आया था।

फिर हम नानी की डेड बॉडी को लेकर घर आ गए और सब रिश्तेदारों को फोन करके ख़बर दी। उनकी अंतिम यात्रा की तैयारी शुरू की गई। घर में मातम पसरा हुआ था। लोग भी आते-जाते रहे। फिर कुछ देर बाद हम उनको लेकर श्मशान घाट निकल गए। तब तक अंधेरा भी हो चुका था। श्मशान घाट में पहुँच कर हमने उनका अंतिम संस्कार किया और वहाँ से वापस आते-आते हमें काफी रात हो गई थी।

सारे मेहमान भी वापस जा चुके थे। हम सब भी रात में सोने के लिए लेट गए। मम्मी बाहर का दरवाजा बंद करने जा रही थीं कि तभी उन्हें लगा कि बाहर दरवाजे के पास कोई खड़ा है। मम्मी ने ठीक से देखने के लिए जैसे ही दरवाजे का पर्दा हटाया, तो वह बहुत डर गईं। उन्होंने देखा कि उनकी मामी, जिनकी आज ही मौत हुई थी, वह वहाँ दरवाजे के पास खड़ी थीं। मम्मी वहीं खड़ी जमी रह गईं। उनके मुँह से आवाज भी नहीं निकल रही थी। किसी तरह मम्मी ने दरवाजा बंद किया और अंदर आकर पापा को बताया कि मामी बाहर खड़ी हैं।

लेकिन पापा को यकीन नहीं हुआ। फिर मम्मी ने भी ज्यादा कुछ नहीं कहा। थोड़ी देर बाद हम सब लोग सो गए। लेकिन रात में ही मम्मी की तबीयत बहुत खराब हो गई। उन्हें बहुत ठंड लग रही थी। पापा ने जल्दी से मम्मी के पैरों में तेल मालिश की, जिससे उन्हें थोड़ा आराम मिला। उस वक्त हमारा कुत्ता भी रोये जा रहा था और बार-बार भोंक भी रहा था। थोड़ी देर बाद मम्मी शांत हुईं और सो गईं।

अगले दिन सुबह हमने एक बाबा को घर में बुलाया। उन्होंने बताया कि इस घर में सच में एक आत्मा है। फिर उन्होंने कुछ मंत्र पढ़े और घर के चारों तरफ कील ठोक दी। यह सब करने के बाद सब ठीक हो गया। मम्मी को नानी की आत्मा फिर कभी नहीं दिखाई दी।

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मेरा नाम रवि प्रकाश है। मैं मध्य प्रदेश के सतना का रहने वाला हूँ। यह कहानी जो मैं बता रहा हूँ, यह मेरी दादी के साथ हुआ था। जब यह हुआ था, तब मेरी दादी 10-11 साल की थीं।

मेरी दादी के मामा का घर रीवा जिले में होता था। एक बार दादी अपने मामा के यहाँ गई हुई थीं। एक दिन दादी अपने मामा के बच्चों के साथ खेतों में आम तोड़ने गईं। उस दिन मौसम थोड़ा खराब सा था और तेज आँधी चल रही थी। लेकिन बच्चों को ऐसे मौसम में ही ज्यादा मजा आता है। तो दादी भी अपने भाई-बहनों के साथ मस्ती करती हुई खेत में आम तोड़ने पहुँच गईं। मामा के खेत से आम तोड़ने के बाद उन लोगों ने सोचा कि क्यों ना पास वाले खेत से भी कुछ आम तोड़ लिए जाएँ।

वे लोग दूसरे खेत में लगे पेड़ के पास पहुँच गए। लेकिन जैसे ही वह पेड़ के पास पहुँचे, अचानक उस जगह एक बहुत तेज बवंडर आ गया। उसके बाद क्या हुआ, उन्हें कुछ याद नहीं। वे तीनों वहीं बेहोश हो गए। जब दादी की आँख खुली तो वह अपने मामा के घर में थीं। उनके मामा ने बताया कि खेत के पास खड़े कुछ लोगों ने उनकी चीखें सुनी थीं।

वह लोग जब वहाँ पहुँचे तो उन्हें आप तीनों रेत में लिपटे हुए बेहोश पड़े मिले। वहाँ के सब लोग उनके मामा को जानते थे और उनके बच्चों को भी पहचानते थे। इसलिए वह लोग उन्हें उठा कर सीधे उनके मामा के यहाँ ले आए। लेकिन फिर उसी रात मामा की लड़की की तबीयत बहुत खराब हो गई। उस पर ‘ऊपरी हवा’ का असर हो गया था।

मामा जी ने एक ओझा को अपने घर बुलाया। ओझा ने बताया कि ये भूतनी खेत से इनके पीछे आई है। उसके बाद उसने क्या किया, यह दादी को पता नहीं, लेकिन फिर सब कुछ ठीक हो गया।

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मेरा नाम दीपक है..और मैं राजस्थान के पाली जिले के जवाई गाँव का रहने वाला हूँ…हम जिस घर में रहते हैं वह काफी बड़ा है.. और हमारे घर में अजीब-अजीब चीजें हमेशा से ही होती रहती हैं.. हमने ये घर किसी और से खरीदा था। जहां हमारा हॉल है वहाँ पहले किचन हुआ करता था… और उस किचन में पहले रहने वाली एक औरत जल के मारी थी। जब हम उस घर में आए तो हमें शुरू से ही उस घर में किसी के होने का एहसास होता था… रात में वो किसी को भी सोने नहीं देती थी। सिवाये मेरे दादा जी के.. अगर कोई सो जाता तो वो उसकी छाती पर आकर बैठ जाती और चांता मारती। दिन में भी यही सब होता था। परेशान होकर हमने कुछ ही दिनों में वो घर खाली कर दिया.. अब वहाँ सिर्फ मेरे दादा-दादी ही रहते थे। एक बार गर्मियों की छुट्टियों में हम सब लोग उस घर में आए थे.. मेरी बुआ और उनके बच्चे भी आए हुए थे। हम सभी एक कमरे में बैठे बातें कर ही रहे थे..की अचानक मेरी बुआ की लड़की जो तब १४ साल की थी..अचानक से रोने लगी.. हमने उससे पूछा..क्या हुआ..रो क्यों रही हो? तो वो बोली की मैंने अपना रोना कंट्रोल नहीं कर पा रही हूँ.. वो रोई ही जा रही थी.. रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी.. और तभी अचानक रोते-रोते वो एक कोने की तरफ इशारा करते हुए बोली — की उस कोने में एक औरत खड़ी है.. वो मुझे मार डालेगी.. हम सभी लोग उस वक्त वहीं थे.. लेकिन हमें कोई नजर नहीं आ रहा था.. इसी बीच मेरी बुआ जो बाहर गई हुई थी.. वो भी आ गई.. बुआ ने बताया की उनका मन बेचैन हो रहा था.. जैसे की कुछ बहुत गलत होने वाला हो। इसलिए वो घर वापस आ गई। घर आकर उन्होंने देखा की उनकी बेटो तो रोई जा रही थी। फिर हम रात में ही उसको हमारे गाँव के एक बाबा के पास लेकर आए। उन्होंने उसके गले पर बबूत लगायी और कुछ मंत्र पढ़े। फिर उन्होंने बताया की तुम्हारे घर में एक भूतनी है.. और वो उस घर में तुम्हारे आने से पहले से है.. तुमने उसके घर के ऊपर अपना घर बनाया है.. वो उस जगह जल के मारी थी। फिर उसके अगले दिन ही मेरी बुआ अपने बच्चों को लेकर वापस अहमदाबाद अपने घर चली गई। कुछ दिन बाद मेरी बुआ की लड़की के पेपर थे। तो उसको एग्जाम हॉल में पेपर देते हुए भी वही औरत दिखाई देने लगी। वो उसके पीछे वहाँ तक पहुच गई थी। वो घर में किसी भी टाइम अचानक बिना किसी बात के रोना शुरू कर देती। वो बोलती की वो औरत कोने में बैठ के मुझे बुलाती है। कहती है की मैं तुझे नहीं छोडूंगी। फिर बहुत जगह घूमने के बाद एक बाबा ने उसको ठीक कर दिया। वो आज बिल्कुल ठीक है। लेकिन जवाई वाला हमारा घर आज भी भूतिया है। उस घर में अब सिर्फ मेरे दादा-दादी ही रहते हैं.. वो मेरे दादा को तो कुछ नहीं कहती.. लेकिन दादी को कई बार धक्का दे चुकी है। हम बहुत सारे बाबाओं के पास भी गए.. लेकिन कोई कुछ नहीं कर पाया.. सब कहते हैं की वो अपने टाइम पर ही वहाँ से जाएगी.. अगर पहले गई तो एक जान लेके जाएगी.. मेरी बहन की शादी उसी घर में हुई थी.. उसकी शादी के एक दिन पहले वो मेरी बहन के सपने में आई और बोली की मैं भी तेरे साथ फेरे लुंगी.. और तेरे साथ तेरे ससुराल जाऊंगी.. सपना देखकर मेरी बहन बहुत डर गई.. उसने ये बात सभी को बताई.. तो हम गाँव के बाबा के पास गए… तो उन्होंने उसको एक धागा बांधने को दिया.. और तब जाकर उसकी शादी ठीक ठाक हो पायी..
आज भी जब कभी हम भाई-बहन उस घर में जाते हैं तो दादी रात में हमारी खाट के चारों तरफ गेहूं डाल देती है। क्यूंकि बताते हैं की कोई भी भूत या चुड़ैल अनाज के पास नहीं आते हैं। वो घर बहुत ही भूतिया है अच्छा हुआ हम उस घर से निकल गए..

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