पाकिस्तान वाले घर में आई चुड़ैल

मेरा नाम संचित वर्मा है और मैं हरियाणा में अंबाला कैंट का रहने वाला हूँ। यहाँ जो हमारा घर है, वो हमने वैसे तो 1990 में बनवाया था, लेकिन मेरे परदादाजी बंटवारे के बाद, पाकिस्तान के लाहौर के एक छोटे से गाँव गुजरात खेड़ा से यहाँ आए थे। मैं जो कहानी बताने जा रहा हूँ, यह सब गुजरात खेड़ा में ही हुआ था। यह 1920 के आस-पास की बात है। मेरे दादाजी की सबसे बड़ी बहन तब दो साल की थीं।

तो एक दिन मेरे दादाजी की सबसे बड़ी ताई जी की मृत्यु हो गई। सुबह का समय था। उनके परिवार वालों ने उन्हें एक बिस्तर पर लिटा दिया। सब रिश्तेदारों के आने में दोपहर हो गई। फिर शाम के समय उनकी अंतिम यात्रा की तैयारी की गई। दाह संस्कार करते-करते शाम के 6 बज गए। फिर घर वापस आते-आते रात के 8 बज गए। घर आकर सबने आराम किया और फिर सोने चले गए।

हमारा पाकिस्तान वाला घर बहुत बड़ा था। सारे रिश्तेदार उसी घर में ही सो रहे थे। मेरी परदादी अपनी सबसे बड़ी बेटी को साथ लेकर सोई हुई थीं। रात में सोते हुए अचानक उनकी आँखें खुल गईं। आँखें खुलीं तो उन्होंने देखा कि जिसे वो अपने साथ लेकर सो रही थीं, वो उनकी बेटी नहीं थी। वो तो कोई घास का बना पुतला था। यह देखकर दादी बहुत डर गईं। उन्हें लगा कहीं कोई चोर या डाकू उनकी बेटी को उठा कर न ले गया हो। क्योंकि वहाँ उससे पहले भी गाँव के कई बच्चों को डाकू उठा ले जाते थे।

दादी ने सबको उठा दिया। तो गाँव के सब लोग इकट्ठे होकर उसे ढूँढने लगे। लेकिन वो कहीं दिखाई नहीं दी। इसी बीच सुबह के 5.30 बज गए। उजाला भी हो गया था। तो अचानक किसी ने देखा कि वो उसी श्मशान घाट में अपनी ताई जी की चिता के पास बैठी हुई थी। वह वहाँ सिर नीचे करके बैठी थी। उसने जल्दी से बाकी सब लोगों को उसके श्मशान में होने की बात बताई। तो सब लोग वहाँ पहुँच गए।

लेकिन सब लोगों के वहाँ पहुँचते ही वह खड़ी हो गई और सामने पड़ी राख के ऊपर नाचने लगी। यह देखकर सब लोग डर गए। उनके चाचा जी उसे रोकने के लिए गए, तो उसने उन्हें भी उठा कर पटक दिया। फिर किसी ने बताया कि इसके ऊपर कोई ऊपरी हवा आ गई है। तो जल्दी से एक मौलवी साहब को बुलाया गया। उस दो साल की लड़की को 8 लोग मिलकर रस्सियों से बाँधे हुए खड़े थे। लेकिन फिर भी वह उन सबपर भारी पड़ रही थी।

मौलवी साहब उसके पास पहुँचे और उससे पूछा, “कौन है तू?”
तो आगे से आवाज़ आई, “मैं इसकी ताई हूँ।”
“क्या करने आई है यहाँ?” मौलवी साहब ने पूछा।
लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। तो मौलवी ने हंटर से मारना शुरू कर दिया। उनके बाल खींचे, थप्पड़ भी मारे। लेकिन वह टस से मस नहीं हो रही थी। मौलवी साहब ने उसे चाकुओं से भी कई बार मारा, लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पड़ा।

जब मौलवी साहब थक गए, तो कुछ देर के लिए खड़े हो गए। इसी बीच सबने देखा कि उस लड़की के शरीर पर इतनी मार से जो भी घाव बने थे, वो अपने आप भर गए।

कुछ देर बाद मौलवी ने उसे फिर से पीटना शुरू किया। लेकिन उसके घाव फिर से भरते जा रहे थे। तभी अचानक वह बोली, “मैं ऐसे नहीं जाऊँगी।”
“फिर कैसे जाएगी?” मौलवी साहब ने पूछा।
“मुझे मीठा पुलाव खाना है,” वह बोली।

“ठीक है।” फिर उनके लिए पुलाव बनवाया गया। पहले उसे कटोरी में दिया। तो उसने खाने से मना कर दिया। फिर एक थाली में दिया गया। उसे भी लेने से मना कर दिया। फिर सीधे एक नाद के बराबर का पतीला लाकर उसके सामने रखा गया। और उसने अकेले ही वह पूरा पतीला साफ कर दिया।

“अब जाएगी?” मौलवी ने पूछा।
“नहीं, अभी नहीं। जितने लोगों ने मुझे पकड़ा हुआ था, उतना पुलाव तो खाकर ही जाऊँगी।”

फिर उसके लिए 7 पतीलों में और पुलाव बनवाया गया। उसने वह सारा खा लिया। वह एक-एक पतीला इतना बड़ा था कि एक पतीले के पुलाव से ही 20-30 लोगों का खाना आराम से हो जाए। उस वक्त दादाजी की बहन का पेट किसी बड़े गुब्बारे जैसा फूल गया था। फिर वह बोली, “अब मैं जा रही हूँ।”

मौलवी बोले, “अच्छा, तो कोई निशानी बता कि जब तू जाएगी तो हमें कैसे पता चलेगा।”
“मैं वो श्मशान की दीवार तोड़ दूँगी,” वह बोली।

फिर वह एकदम से भागती हुई गई और सामने श्मशान की दीवार से जाकर टकरा गई। और वहीं बेहोश हो गई। वह आत्मा चिल्लाते हुए वहाँ से चली गई। कहाँ गई, यह किसी को नहीं पता। लेकिन जब उसे होश आया, तो उसे कुछ भी याद नहीं था।

लेकिन तभी वह बोली, “माँ, मुझे भूख लगी है। मुझे मीठा पुलाव खिलाओ ना।” यह सुनकर सब डर गए। लेकिन मौलवी साहब बोले, “डरो मत। अब सब ठीक है। खिला दो बच्ची को।” यह सब कुछ मेरे दादाजी की बहन के साथ हुआ था। Horror Stories in Hindi. Ghost Stories in Hindi. Bhoot Story. Hindi Horror Stories. Real Ghost Stories in Hindi. Haunted Places in India in Hindi. Horror Stories in Hindi. Ghost Stories in Hindi. Bhoot Story. Hindi Horror Stories. Real Ghost Stories in Hindi. Haunted Places in India in Hindi.

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यह जो कहानी मैं आपको बताने जा रहा हूँ, यह मेरे मामा की बेटी की है, जिसका नाम पिंकी था। यह उसकी कहानी है। मेरे मामा का नाम सादा हुसैन था और वह बहुत ही अच्छे इंसान थे। हम सभी बच्चे उनसे बहुत प्यार करते थे। मामा की शादी होने पर हम सब लोग खुश भी थे और नाराज़ भी। क्योंकि हमें लगता था कि अब हमारे और मामा के बीच में मामी आ जाएँगी।

लेकिन हमारी मामी तो और भी अच्छी थीं। वह हमसे मामा से भी ज़्यादा प्यार करती थीं। फिर कुछ समय बाद मामी ने एक बेटी को जन्म दिया। हम सभी ने उसका नाम पिंकी रखा था। वह बहुत प्यारी थी। हम सभी लोग उससे बहुत प्यार किया करते थे।

पिंकी की नानी का घर कराची में था। जब वह 5 साल की हुई, तो पहली बार वह किसी काम से कराची अपनी नानी के घर गई थी। उस समय मामा किसी काम से उनके साथ नहीं जा सके थे। मामी वहाँ अपने घर करीब एक महीना रुकीं। फिर उनके वापस आने के एक दिन पहले मामी के भाई ने पार्क घूमने जाने का कार्यक्रम बनाया। मामी ने पिंकी को सफेद रंग का फ्रॉक पहनाया और खुद भी कपड़े बदलने लगीं।

मामी के भाई को किसी ने गुलाब के परफ्यूम की एक बोतल गिफ्ट की थी, जो उस वक्त उसी कमरे में रखी हुई थी। पिंकी ने उस बोतल से खेलते हुए उसका सारा परफ्यूम अपने ऊपर गिरा लिया। उसकी मम्मी ने देखा तो उसे बहुत डाँटा। इसी बीच उनका भाई उन्हें बाहर से आवाज़ देने लगा कि जल्दी चलो, देर हो रही है। तो मामी ने जल्दी में पिंकी के कपड़े नहीं बदले और उसे वैसे ही पार्क में ले गईं।

लेकिन पार्क में उन लोगों ने देखा कि बाकी सब बच्चे तो वहाँ एक साथ खेल रहे थे, लेकिन पिंकी वहाँ एक पेड़ के पास खड़ी पेड़ से बातें कर रही थी। मामी ने उससे पूछा, “तुम किससे बात कर रही हो?” लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया।

घर आते-आते पिंकी को तेज बुखार हो गया था। लेकिन अगले ही दिन उनकी ट्रेन की टिकट बुक थी। इसलिए उन्हें वापस जाना ही था। रात में सफर करते हुए मामी ने पिंकी को गोद में लिया हुआ था। वह खिड़की के बगल वाली सीट पर बैठी थीं।

कि तभी उन्होंने देखा कि खिड़की में से एक लड़की अंदर आई और ठीक उनके सामने आकर खड़ी हो गई। पहले तो मामी को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ। लेकिन फिर वह लड़की उनसे बोली, “इस बच्ची को कहाँ ले जा रही हो? यह मेरी है।” इतना कहते ही वह लड़की वहाँ से गायब हो गई। मामी ने पिंकी को देखा तो वह मर चुकी थी।

यह देख मामी रोने लगीं। तो उनके रोने की आवाज़ सुनकर साथ वाले डिब्बे से एक औरत उनके पास आई और उसने मामी से कहा, “आप रो मत। क्योंकि ट्रेन में मृत शरीर लेकर जाना मना है। आप रोएंगी तो यह आपको ट्रेन से नीचे उतार देंगे। इसलिए तुम बस अपने घर पहुँचने का इंतजार करो।”

तभी मामी ने महसूस किया कि पिंकी का जिस्म बड़ा होता जा रहा है। और देखते ही देखते पिंकी की शक्ल और कद उस लड़की जैसे हो गए थे। किसी तरह अल्लाह का नाम लेते हुए मामी घर आईं। लेकिन घर में कोई भी पिंकी की बॉडी को देखकर यह नहीं कह सकता था कि यह एक 5 साल की बच्ची की बॉडी है। ऐसा लग रहा था कि वह किसी बड़ी लड़की का मृत शरीर है। उसे देखकर मामा बहुत रोए। फिर उसे दफना आए। फिर उसी रात मामी के कमरे में पिंकी जैसी एक बच्ची आई और बोली, “तुम्हारी बेटी का रूप मैंने लिया है और उसका मैंने अपना रूप दे दिया है।” आज भी जब मैं मामा के घर जाता हूँ और पिंकी की फोटो देखता हूँ, तो मेरी रूह काँप जाती है।

यह दूसरी कहानी जो मैं बता रहा हूँ, यह ज्यादा बड़ी तो नहीं है, लेकिन बिल्कुल सच्ची है। यह मालेगांव की कहानी है। मालेगांव में वैसे तो बहुत सारे अजीब और डरावने राज छुपे हुए हैं। लेकिन यहाँ एक ऐसी जगह भी है जहां अगर कोई गलती से भी चला जाए, तो उसका बचके आना बहुत मुश्किल होता है।

मालेगांव में कैंप नाम की जगह है। वहां बहुत ही शानदार होटल और शो रूम्स बने हुए हैं। उसी इलाके के अंदर सेक्टर-37 में एक ऐसी हवेली बनी हुई है कि जिसके सामने से अगर कोई रात में भूल से भी चला जाए तो या तो वो जिंदा बच नहीं पाता, और अगर बच भी जाए, तो अपना मानसिक संतुलन खो देता है। मतलब की वह इंसान पागल हो जाता है।

उस हवेली का न तो कोई मालिक है, न ही उसमें कोई किरायेदार रहता है। बहुत साल पहले उस हवेली में एक बड़ा परिवार, जिसमें मां-बाप, तीन बेटे और तीन में से दो की पत्नियां थीं, 7 लोग उस घर में रहा करते थे। सब लोग आपस में प्यार से रह रहे थे, तब तक जब तक कि उस हवेली के बंटवारे की बात नहीं हुई थी।

प्रॉपर्टी के बंटवारे में सबसे छोटे वाले बेटे, जिसकी शादी नहीं हुई थी, उसको बहुत ही कम हिस्सा मिला। इस बात को लेकर वह बहुत नाराज था। हर रोज उन तीनों भाइयों में झगड़ा होने लगा। लेकिन बड़े भाइयों ने फिर भी उसको कुछ नहीं दिया। उसके मां-बाप ने भी उसकी बात नहीं मानी, बल्कि उल्टा उसी को डांट लगाई। घर के सब लोगों ने उसको प्रॉपर्टी के लिए झगड़ा करने को लेकर काफी बुरा-भला कहा।

इसी बात से नाराज होकर एक रात उसने घर के सब लोगों को सोते हुए मार डाला और वहां से भाग गया। पुलिस उसे ढूंढने लगी, लेकिन वो उनके हाथ नहीं लगा। लेकिन नौवें दिन उसे याद आया कि प्रॉपर्टी के कुछ जरूरी कागज घर में ही भूल गया है। इसीलिए दसवें दिन उसने चोरी-छुपे उस हवेली में जाने का फैसला किया। लेकिन उस हवेली में जाने के बाद उस लड़के की भी अजीब तरीके से मौत हो गई।

उस दिन के बाद से उस हवेली को “7 खून हवेली” के नाम से बुलाया जाता है। आज भी लोग रात में उस हवेली के सामने से जाने से पहले दस बार सोचते हैं। लोग बताते हैं कि उन सातों लोगों की आत्माएं आज भी उस हवेली में भटकती हैं और दिन में भी उस हवेली के सामने से जाने पर संपत्ति की कोई बात नहीं करनी चाहिए।

आज भी रात होने के बाद उस हवेली से लोगों के झगड़ने की आवाजें सुनाई देती हैं।

यह दूसरी कहानी जो मैं आपको बताने जा रहा हूँ, वह भी मालेगांव की है। यह बात मुझे मेरे मामा ने बताई थी। गाँव में मामा के घर के सामने एक मेस बना हुआ है, जहां गरीब लोगों को मुफ्त में खाना दिया जाता है।

मामा ने बताया कि उनके गाँव में एक बूढ़ी औरत रहा करती थी। वह बहुत ही गरीब थी। इसीलिए वह वहां मेस में खाना खाने आती और फिर उसके सामने ही ज़मीन पर एक बोरा बिछाकर वहीं सो जाया करती थी।

एक बार रात को मामा के गाँव में कोई बारात आई हुई थी। तो रात में सोते हुए उस बूढ़ी औरत को टॉयलेट जाने की जरूरत महसूस हुई। वैसे तो वह हमेशा वहां पड़े पत्थरों के पीछे ही टॉयलेट करने जाती थी। लेकिन उस रात उस जगह से बारात जा रही थी, तो हमारे घर के बगल में बने एक पुराने क्लीनिक में टॉयलेट करने चली गई।

वह क्लीनिक बहुत पुराना था और बिल्कुल खंडहर हो चुका था। और रात में तो क्लीनिक बहुत ही डरावना लगता था। रात में वह उस क्लीनिक में गई और जैसे ही उसने टॉयलेट का दरवाजा खोला, तो उसके मुंह से जोर की चीख निकल गई। वह वहीं बेहोश हो गई।

मामा ने उसकी चीखने की आवाज सुनी तो वह भागकर उसके पास गए और उसे उठाकर अपने घर के पास लेकर आए। और उसके चेहरे पर पानी की छींटे मारीं। जब उसे होश आया तो मामा ने उससे पूछा कि क्या हुआ था? ऐसी क्यों चीखी?

तो उस औरत ने बताया कि जब उसने टॉयलेट का दरवाजा खोला, तो देखा कि टॉयलेट के अंदर एक बहुत ही लंबा आदमी बैठा हुआ था। उसके दरवाजा खोलते ही उस आदमी ने अपनी गर्दन पूरी पीछे घुमा दी। यह देखकर उसकी चीख निकल गई।

मामा ने बताया कि वह आदमी पास के कब्रिस्तान से वहां कई बार आता है। वहां के सब लोगों को उसके बारे में पता था। उसे उस आदमी को वहां ‘खैस’ के नाम से बुलाया जाता है। और जब भी उसे भूख लगती है, तो वह लोगों को बहुत ही गंदी मौत देता है और उन्हें खा जाता है।

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